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31aug2023 .. जब कुछ समझ नहीं आ रहा था तब कुछ ये लिखा.. जब आपके साथ स्थितियाँ दोहराई जाने लग जाती हैं ... 🙃

चल - चल, रह चलती...  मैं खुद को कहती ।।  छोर न जानूँ, कोई ओर न जानूँ...  मैं दो मन लिए बैठी.. किसकी बात मानूँ..??  चल - चल, रह चलती...  मैं खुद को कहती ।।  क्यों फिर?? कब तक??  कौन क्या?? मैं क्या?? किसको खबर 🤔??  ये मेरा पथ अनंत तक..।।  कोशिशें मेरी हद- बेहद...  रफ़्ता- रफ़्ता बढ़ी परिसीमा तक,,  छणिक भर में अंत इनका...  मेरा जीवन जैसे बेमतलब - बेसार,,  चल - चल, रह चलती...  मैं खुद को कहती ।।  ज़मीन पर लौटूँ, आसमाँ में रहूँ...  कभी दोनों के मध्य हवाओं में बहूँ,, न इस पार - न उस पार...  ख़ुद को खोला- ख़ुद को भीचा,,  न पाया मैंने इस व्यक्तित्व का कोई सार...  फिर उसी डोर..  चल - चल, रह चलती...  मैं खुद को कहती ।।  अनंत के अंत में हूँ शायद,, प्रकृति वही प्रक्रियायें फ़िर दोहराती..  सब एक ही प्रकार का लगता,,  अस्तित्व आत्मा को लानते देता...  क्या?... बदला क्या कुछ..??  प्रारंभ से अनंत में...  क्या था कुछ..??  जैसे सबका एक ही अर्थ..  सब नीरस- सब निर...

इस बार कुछ कहना नहीं चाहती कि .."क्यूँ लिखी ये कविता"?? या कैसे ये विचार आया??🙃उम्मीद है कि आप सब समझ ही जायेंगे।। बस पहली बार कुछ प्रेम पर लिखने की कोशिश की है😌... हालाँकि ज़्यादा प्रेम के पक्ष में नहीं लिख पायी हूँ,, जो हमेशा मेरे लिए एक विडंबना रही है 🙂

कोई तो होता..जो छूता नहीं जिस्म को,,  मेरी रूह को छू जाता,,  उसका पहला बोसा.. माथे पर होता,,  अकेले रोता हुआ ना छोड़ता,,  सीने से लगाकर .. ख़ुद भी रो जाता,,  ऐसा कोई तो होता।।  मेरे होने पर कितनों को लगा.. ये होगी तो सब अच्छा होगा..  तुम्हारे होने से लगता है सब ठीक हो जायेगा,,  जिसे मैं ये कह पाती .. ऐसा कोई तो होता।।  कोई तो होता..  जिसका पहला स्पर्श कमर पर न होता,,  हाथ थामकर.. वो थम जाता,,  यूँ ही सारी रात गुज़र करता..  ऐसा कोई तो होता।।  उसकी ज़रूरत जिस्मानी न होती..  वो रात भर यूँ बंद कमरे में ..  सब्र बाँध कर बैठता,,  उसकी मेरे लिए की गयी तारीफों में..  मेरे लबों का ज़िक्र न होता,,  कहीं तो मेरी सीरत को बयाँ करता,,  ऐसा कोई तो होता।।  किसी का ज़ेहानी सुकून बनी मैं,,  किसी का होना .. मुझे बेपरवाह कर जाता,,  ऐसा कोई तो होता।।  बाइक की पिछली सीट पर भले ही न बैठाता..  जब मैं सीढ़ियों पर चढ़ते- चढ़ते थक जाती..  पापा की तरह पीठ पर बैठाकर ले जाता,,  36-24...

"औरतों का दिमाग़ घुटनों में होता है" बहुत बार ऐसा सुनें जाने के आधार पर कुछ आंकलन .. मेरे द्वारा इस कविता के माध्यम से अभिवियक्त करने की कोशिश की गयी है।।

हाँ हम बेवकूफ हैं,,  हम घरेलू औरतें हैं ।।  हमे नहीं आता पैसों का हिसाब करना,  नहीं आता इंवेस्ट करना,,  हाथों में कभी ज़रूरत से ज़्यादा पैसे आये ही नहीं,, कमाने का हक़ हमें दिया ही नहीं,  दिन की सब्जी का खर्चा मायके में,  बच्चों की पॉकेट मनी का खर्चा ..  ससुराल में जुड़ जाता है,,  हमने इन सब कामों की तंख्वाह कभी मांगी ही नहीं,,  इसलिए हाँ हम बेवकूफ हैं,,  हम घरेलू औरतें हैं।।  हमें नहीं आता बैंक का फॉर्म भरना,  FD - RD का हिसाब रखना,  राशन के फिक्स डिपॉजिट (FD) की उलझनों में बंधे रहना,,  ज़रूरत के मुताबिक अनाज डब्बो में रखना,,  इतना ही जोड़ घटाना करने का दायरा सीमित रहा हमारा,,  इसलिए हाँ हम बेवकूफ हैं,,  हम घरेलू औरतें हैं।।  लोगों से डील करना हमें आता ही नहीं,,  Straight फॉरवर्ड ना बोलकर ,,  किसी को convince कर लेना,,  ये कैसे आता हमको??  Confrence मीटिंग की जगह ,, बस एक परिवार ही शामिल था हमारी ज़िंदगी में,,  पूरा दिन..हर एक दिन इन्हीं को समर्पण हमारा,,  इसलिये हाँ ...

24/oct/2022... that day i felt the side of an oldage parents... then i wrote some lyrical tease🎼😔

काँधे पर बोझ उठाया.. वो बाप था, सर पर बोझ उठाया.. वो माँ थी,  जिसने लाचारी में छोड़ा.. वो औलाद थी।।  औलाद का मन जिसकी ओर बढ़ा..  वो कुछ दिन पहले आई.. उसकी हमसफर थी।  मुद्दा जो था, हमसफर का..  औलाद की भी सोच सही थी, अब ज़रूरत वालिदैन की नहीं..हमसफर की थी।।  वो भूल गया.. गोद में किसने उठाया?  सीने से किसने लगाया..???  जिसने अपने शौक मारे.. वो बाप था,  अपना पेट खाली रख.. उसकी पसंदीदा चीजें रखने वाली माँ थी,,  जिसने शौक पूरे किये.. पेट भर खाना खाया,  वो औलाद थी।।  जिसकी ख्वाहिशें पूरी हुईं.. वो औलाद थी।  जिसने बाप से उसके लिए गुज़ारिशें की वो माँ थी,  जिसने हाथ फैलाये लोगों के सामने वो बाप था।।  तुमने क्या ही किया मेरे लिए..?  जो भी किया तुम्हारा फर्ज़ था..  ऐसा बोलने वाली औलाद थी। आँखों में आँसू भरने वाली माँ थी,  दिल पर पत्थर रखने वाला बाप था।।  गलतियों पर पर्दा डालने वाली माँ थी, गलतियों को सुधारने वाला बाप था,,  एक खरी - खोटी पर.. माँ - बाप को छोड़ने वाली औलाद थी।।  दिन भर की थकन के ब...

Today 22/oct/2022... An intuition coming in my mind about... when two strangers see🧐 each other & one's smile😃 clicked another one..😍

After long time... I'm tried to write some melody vibes (romance) 🥰 but it could be little bit... 😉 एक हँसी.. वो हँसी...,  और उसकी हँसी,  क्या थी हँसी..!!  हँसी - हँसी में हँसी कमाल कर गयी,,  जाने- अंजाने उन दोनों को मिलनसार कर गयी,,  जाने कितनों के साथ ये हँसी...  हसीन बवाल कर गयी,,  फिर कुछ उलझनें .. ऐसा माहौल कर गयीं,,  ना वो हँसा.. और,  ना वो हँसी,,  ऐसी टीस मन को बेहाल कर गयी!! 

Its a words creation 💫of a person about their loving person & wished ever he come back..😔 ?? With it sudden a thought comes to their mind that he come back or not... 🤔does matter??

बरसों रहा हूँ मैं...  ख़ुद के बग़ैर,, तेरे बिन रहना...  क्या मुश्किल होगा...??  हर बार तुझको पाकर ..  ख़ुद को खोया है मैंने,,  इक बार फ़िर. ..  तुझको पाकर भी,,  अब क्या हासिल होगा...?? 

23Aug2022...when i heared about a victim girl which sufffered from gang rape🙃.. and their victims were released🙁 or we can say they got freedom after doing this worse🥺 with someone's life!! so i stucked in her feelings🥲 about what messed going in her life in every moment?? 😶

Then i asked some ques to my self which she suffered ...        "एक सवाल - कितना ही आसान होता है"??   कितना आसान होता है.. ??  अपने ही शरीर से नफ़रत कर पाना, अपने ही अंग को दुत्कारना ,,  महसूस करना... अपनी ही योनी ,,  अपने ही भाग का .. तकलीफ़ की वजह बन जाना,,  कितना आसान होता है?? मरते हुए जी जाना ...  अपने ही अंग को दूसित पाना...  कितना ही आसान होता है , मन को ये समझाना.. ?  गलती न होकर भी सह जाना..  किसी की वासनाओं का शिकार होना...  फ़िर स्वयं को मुजरिम की नज़रों से देखे जाना,,  कितना आसान होता है..??  रूह को क़फ़न पहनाकर जिये जाना...  गुनाह कर उनका खुले आम घूमना..  अपने ही गुनाहगारों की आज़ादी देखना,,  ख़ुद को बंद कमरे में ग़ुलाम कर देना..  कितना आसान होता है..??  मन ही मन ख़ुद को नोचना.. रूह की चीख़ सुनना,  और बस हर पल ख़ुद से घृणा करते जाना..  कितना आसान होता है..??   एक स्त्री होने का अर्थ समझ पाना...,  कितना आसान होता है..??  नोचे हुए जिस्म के साथ र...