Whenever you don't understand what you want...but from inside a strange feeling comes out and this feeling gives anxiety...😖 न समझे वो न समझे जहां.. रोऊँ बस मैं, रोये मेरा जहां,, खाली से बजता रहता मन.. न जानूँ क्यूँ ?..ये बेवजह,, न समझे वो न समझे जहां.. चल चली चलती चली,, रुकी न थमी.. बस ठहर - ठहर कर चली,, चीख- चिल्लाहट.. सब अकेले ही पायी, मन ही मन मर गया सब कुछ.. कब? कैसे? क्यों..? सवालों पे सवाल... खुद ही से पूछूँ.. खुद को ही खरोचूँ,, मैं मन की मारी ,, मन के हारे हारी,, कौन किसको..? और कौन किसका?? न समझे वो न समझे जहाँ..।।
न जाने कल क्या होगा ,, कुछ ख़फा होंगे, तो कोई जीने की वजह होगा। कोई हाथ छोड़ेगा , तो किसी का हाथ कन्धों पर होगा । न जाने कल क्या होगा ,, कोई पीछे से हंसेगा हम पर , तो कोई साथ बैठकर रोया हो...
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