When I start... my professional life! I miss that time which i spent with my parents from childhood to teenage ๐Ÿ˜

सुबह उठती हूँ तो माँ तेरी आवाज़ नहीं आती ,
उठजा  वरना  देर  हो  जाएगी ,,
तेरी इस परवाह की कमी,
अब अलार्म से पूरी हो जाती है,,
आज जब काम पर जाती हूँ,
नाश्ता किए बिना मत जाना ,
रसोई से ऐसी कोई आवाज़ नहीं आती ।।

जब कॉलेज जाती थी,
बिन पूछे टिफ़िन पैक कर देती थी,,
तू मेरे सब कपड़े निकालकर रख देती थी ,,
परेशान न होना पड़े मुझे जब मौज़े ढूँढू तो ,
सारी परेशानी तू खुद ही ले लेती थी ।।

जिस आज़ादी के लिए तुमसे लड़ती थी मैं ,
आज सब कुछ पाकर भी अधूरी रह जाती हूँ मैं ।

थक कर जब काम से आती हूँ,
मेरी दिन भर की बीती बातें सुनने को,,
माँ अब तुम साथ नहीं होती,,
रसोई से शाम की चाय की वो खुशबू नहीं आती ।।

टूट जाती हूँ ...8 घंटे की थकन से इतना ,
कभी बिना खाये बस थक कर सो जाती हूँ ,,
शरीर की इस दुखन के साथ ,
अगले दिन उठकर भी जब काम पर जाती हूँ ,
पापा की बरसों वाली मेहनत की वो थकन...
अब महसूस कर पाती हूँ ।।

खाना बनाते हुए रोटी जल जाए ...
तो बुरा इस बात का नहीं लगता ,
बस मन छोटा हो जाता है ये सोचकर ...
अब ग़लतियों पर डांटने वाला कोई नहीं होता ।।

इंजन बनाते - बनाते जब हाथ दर्द कर जाते हैं ,
तो शाम को कोई बाम लगाने वाला नहीं होता ।

अब रात को देर से आऊँ...
तो इंतज़ार में दरवाज़े पर बैठी माँ ..
अब तुम नहीं होती हो ,,
मुझको मेरी ही फ़िक्र में डांटने वाले पापा अब आप कहाँ होते हो ,,
माँ - पापा आप बहुत याद आते हो ।।
माँ - पापा आप बहुत याद आते हो ।।

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