The night of 31stdec2018 .... I sitted alone in my room & hearing the noise of party songs & talked some new friends.But no one old friend had talked to me... & I realized that most of the things are invisible...then my ❤'s sensation creats a storytelling poetry....๐Ÿ’“๐Ÿ’ž

वो दोस्त अब कहाँ नज़र आते हैं..???
सुबह शाम उस स्कूल वाली रोड से
हर रोज़ हम यूँही गुज़र आते हैं...

अब कोई ओये अबे सुन वाली आवाज़ नहीं आती,
हंसी तो खिलखिलाती है वहाँ...
वो उस अपनेपन का एहसास नहीं दिलाती,,

31st से पहले हर रोज़ रात को ग्रीटिंग्स कलेक्ट अब नही होते...
ना उस रात शायरी ढूँढ़ कर कार्ड्स में लिखी जाती है,,

New year से 2-4 दिन पहले कार्ड्स का हिसाब
अब नहीं लगता...
1rs. वाला कार्ड casual friend ;
2rs. वाला थोड़ा अच्छा friend ;
5rs. वाला बेस्टी के लिये आता था...
अब वो दिन कंपनी के डॉक्यूमेंट में फंसे हुए निकल जाते हैं,,

कब new year आ गया ,,पता ही नही चलता
लगता है जैसे रफ्तार बहुत तेज़ हो गयी है वक़्त की...

आज वो 31st की नाईट अलग-अलग शायरी ढूंढने की जगह एक storytelling poetry  में convert हो गयी है....
बहुत कुछ बदल गया इन शायरियों को एक poetry में convert करने के दरमियाँ,,,

31st की पार्टी में नमकीन की जगह चकना ओर cold drink की जगह दारू ने ले ली है...
अब होश में न रहकर बेहोशी एक enjoyment  हो गया है...
वो प्यारा सा हँसता हुआ बचपन कहीं खो गया है,,

आज माँ पापा घर में अकेले..
बच्चे की फ़िक्र करते-करते सो गए..
न जाने कब तक लौटेगा वो..
लेकिन बच्चे को मदहोशी में मज़े लेने की फ़िक़्र है बस,,

रूम वाली पार्टी के गानों का शोर...
अब कानों में गूंजता है,,
अब तो कोई bikes पर सवार...
नशे में बेफिक्र घूमता है,,

पहले मम्मी की इजाज़त लेकर...
new year party में जाना,,
अब तो रात को नशे में आकर चुपचाप सो जाना...
माँ को अपने आने की ख़बर से...
इत्तला करना भी अब मुनासिब नहीं होता,,

और अब मेरा ये 31st का वक़्त ...
दोस्तो के बिना ही कट जाता है,,

क्योंकि उनका वक़्त मेरे और ...
मेरा वक़्त उनके नसीब में नहीं लिखा जाता है।।

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